प्रतिबंध: जासूसी रोकने के लिए कर्मचारियों का सोशल मीडिया उपयोग; नेवी बेस, डॉकयार्ड और शिप पर स्मार्टफोन बैन

नौसेना ने ऑनलाइन जासूसी से बचने के लिए कर्मचारियों को सोशल मीडिया का उपयोग बंद करने का आदेश दिया है। नौसेना के अनुसार, अतीत में 7 कर्मचारी सोशल मीडिया के माध्यम से दुश्मन देश को संवेदनशील जानकारी लीक करते हुए पकड़े गए थे। इसी के चलते सख्त कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों ने नौसेना के ठिकानों, डॉकयार्ड और युद्धपोतों पर स्मार्टफोन के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया।

आदेश के अनुसार, अब नौसेना मैसेजिंग ऐप नेटवर्किंग और ब्लॉगिंग ऐप, कंटेंट शेयरिंग, होस्टिंग और ई-कॉमर्स वेबसाइट नहीं खोल पाएंगे। खबरों के मुताबिक, इस प्रतिबंध का उद्देश्य आने वाले समय में नौसैनिकों को सोशल मीडिया पर शहद के जाल से खतरे से बचाना है।

खुफिया एजेंसियों ने आंध्र प्रदेश के 7 नौसेना कर्मियों को गिरफ्तार किया
आंध्र प्रदेश पुलिस ने 20 दिसंबर को नौसेना के 7 कर्मियों को गिरफ्तार किया। उन सभी पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप है। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और नौसेना खुफिया विभाग ने संयुक्त रूप से उन्हें पकड़ने के लिए ‘डॉल्फिन की नाक’ नामक एक अभियान चलाया। इसके जरिए जासूस के रैकेट का पता चला था। जांच एजेंसियों ने इस मामले में हवाला ऑपरेटर को भी हिरासत में लिया। सभी आरोपियों को विजयवाड़ा में एनआईए अदालत ने 3 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इस मामले में कुछ अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है।

आरोपी सोशल नेटवर्किंग साइट से हैंडलर के संपर्क में आया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2017 में सभी आरोपी नौसेना में शामिल हो गए। सितंबर 2018 में तीन से चार महिलाएं सोशल नेटवर्किंग साइट के संपर्क में आईं। महिलाओं ने बाद में उन्हें एक व्यवसायी के रूप में पाकिस्तानी हैंडलर से मिलवाया, जिन्होंने उनसे गोपनीय नौसैनिक जानकारी प्राप्त करना शुरू किया।

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